थोडा मैं थोडा तुम, इस मकाम को पूरा करें
कुछ तुम कहो कुछ हम, इस बात को पूरा करे
लिखे हम कहो तुम , इस शायरी को पूरा करें
मंजिलें हैं हजारों , के हमनें सिर्फ तुम्हें चुना
तुम चुनो हमें , के ये सफ़र पूरा करें
जज़बात हो हमारे, लब्ज़ हो तुम्हारे और बात एक हो
ख़ामोशी मैं उभरी मुहब्बत का इज़हार पूरा करे
Deep, profound, and yes incomplete! There definitely is more! :)
ReplyDeletem glad u liked it
ReplyDeletei liked ur poem. it's good
ReplyDeletei liked ur poem. it's very good
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