मैं लिखुँ वो लिखें , क्या लिखा पता नहीं
हम चलें वो रुकें , मंज़िले कहा पता नहीं
तू शिकार प्यार का, और मैं नहीं होश में
य़े सुर्रूर इश्क़ का या हम बीमार पता नहीं
कुछ गम दिल ने कहे , कुछ ऑसुओंने पी लीये
कुछ दफ्न ख़ामोशी मैं , बाकी जो बचें पता नहीं
तू मेरा अक्स है , और मैं तेरी परछाई
ज़माना कहे कोन है , हम कहे पता नहीं
कुछ रिश्तें बेनाम से , और जज़बात बेज़ुबान
सोनी तेरे मुहब्बत कि इन्तिहाँ पता नहीं
हम चलें वो रुकें , मंज़िले कहा पता नहीं
तू शिकार प्यार का, और मैं नहीं होश में
य़े सुर्रूर इश्क़ का या हम बीमार पता नहीं
कुछ गम दिल ने कहे , कुछ ऑसुओंने पी लीये
कुछ दफ्न ख़ामोशी मैं , बाकी जो बचें पता नहीं
तू मेरा अक्स है , और मैं तेरी परछाई
ज़माना कहे कोन है , हम कहे पता नहीं
कुछ रिश्तें बेनाम से , और जज़बात बेज़ुबान
सोनी तेरे मुहब्बत कि इन्तिहाँ पता नहीं
