Thursday, January 16, 2014

Pata Nahi

मैं लिखुँ वो लिखें , क्या लिखा पता नहीं
हम चलें वो रुकें , मंज़िले कहा पता नहीं

तू शिकार प्यार का, और  मैं नहीं होश में
य़े सुर्रूर इश्क़ का या हम बीमार पता नहीं




कुछ गम दिल ने कहे , कुछ ऑसुओंने पी लीये
कुछ दफ्न ख़ामोशी मैं , बाकी जो बचें पता नहीं

तू मेरा अक्स है , और मैं तेरी परछाई
ज़माना कहे कोन है , हम कहे पता नहीं

कुछ रिश्तें  बेनाम से , और जज़बात बेज़ुबान
सोनी तेरे मुहब्बत कि  इन्तिहाँ पता नहीं 

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