Sunday, July 24, 2011

थोडा मैं थोडा तुम, इस मकाम को पूरा करें
कुछ तुम कुछ मैं . इस तस्वीर को पूरा करें

कुछ तुम कहो कुछ हम, इस बात को पूरा करे
लिखे हम कहो तुम , इस शायरी को पूरा करें

मंजिलें हैं हजारों , के हमनें सिर्फ तुम्हें चुना
तुम चुनो हमें , के ये सफ़र पूरा करें

जज़बात हो हमारे, लब्ज़ हो तुम्हारे और बात एक हो
ख़ामोशी मैं उभरी मुहब्बत का इज़हार पूरा करे


To be continued........probably

Saturday, July 23, 2011

To

जलजलाहत सी दिल में, आखों में उतर आ गई
आज शाम बहोत जोरोकी बारीश हो गई

हम वही रुक गए और ज़िन्दगी चलती रह गई
जैसे रूह निकली हो और सांसें चलती रह गई

या रब अब तो मिला दे माहि से, के जान निकल गई
नम से हूवे सोनी के दर्द की इन्तहा  हो गई







Tuesday, July 5, 2011

मिलता नहीं जवाब , क्या सवाल गलत हो जाते है
क्या इलज़ाम लगायें इंसानों पर , क्या हालत गलत हो जाते है

बेदाग़ सी ज़िन्दगी पर एक शीट धब्बा सी नजर आती है
दागों से भरें दामन लगें साफ़ , क्या नज़रियें गलत हो जाते है

मुश्किलें मिलती है हर मुसाफिर को , मंजिले आसानिसे नहीं मिलाती
आसानीसे मिली शोहरत मैं क्या नीयतें बदल जाती है