Wednesday, February 14, 2018

Why to see so differently


(This was written way back when i can write. This was in dump. But now that I cant write, I like this as well)

Why to see so differently
cause nobody around can see
making fun and laughing at Scene
they wont understand if they cant see
why to see so differently
                                                                                   


lost in thoughts
why wouldn’t you wake up
cause nobody feels
dead in their dark tomb
they just live lifelessly
so why to live so differently

Thursday, January 16, 2014

Pata Nahi

मैं लिखुँ वो लिखें , क्या लिखा पता नहीं
हम चलें वो रुकें , मंज़िले कहा पता नहीं

तू शिकार प्यार का, और  मैं नहीं होश में
य़े सुर्रूर इश्क़ का या हम बीमार पता नहीं




कुछ गम दिल ने कहे , कुछ ऑसुओंने पी लीये
कुछ दफ्न ख़ामोशी मैं , बाकी जो बचें पता नहीं

तू मेरा अक्स है , और मैं तेरी परछाई
ज़माना कहे कोन है , हम कहे पता नहीं

कुछ रिश्तें  बेनाम से , और जज़बात बेज़ुबान
सोनी तेरे मुहब्बत कि  इन्तिहाँ पता नहीं 

Friday, August 23, 2013

नया सवैंरा



कुछ  पल छूट गयें
कुछ  पल साथ होलिये
पल जों साथ बितायें
यादों में घुल गयें

थोड़ी आसुवों भरीं बारिशें
थोड़ी हसीं में भरीं पुहांरें
सब सिमटें हुवे कल
आज ढुडऩे निकली नया सवैंरा

फ़िर खिलें फूल और तारें झिलमिलायें
कुछ हमनें अपनें सिरहानें छुपाये
शाम हवी धुंदली और गाने लगा दिल
हमने समझाया ऐ दिल ये नहीं तेरी मंजिल
फ़िर चला रासतां और चली मैं
फ़िर  ढुडऩे निकली नया सवैंरा


Tuesday, August 28, 2012

कुछ लिखे हम मगर , कोई पढ़े और जानले
मेरी आखों से आज, मेरे हाले -दिल जानले 

यूँ ना अपनी ही सुना, मेरी भी तो सुन ज़रा 
कुछ कहें  पर लब्ज़ नहीं, तू ख़ामोशी पेहेचानले 

मैं तेरी परछाई  सी , और  तू मेरा वजूंद 
लेकिन तेरा वजूंद मुझसे है, ये भी तू मानले 





रुक गया झोका यही , कह गया तेरा नाम 
इस शोरे-ऐ -जहां मैं , मेरी आवाज़ पेहेचानले 

दिवाना सा  फिरे  माहि, तू  अधुरा  दश्त मैं
सोनी करें पूरा गर , मोहब्बत को इबादत मानलें 

Friday, July 6, 2012



लबों से बातें हो कुछ , गिलें शिकावें और सही
 आखें अभी नम है , कुछ बातें और सही

युएँ ही दिल लगा लिया , कह गये हमसे य़ू
जैसे दिल बहलाने के लिए, एक खिलौना और सही

युही पढ़ले हालें दिल, कभी कही किसी रोज़
हजारों खतों मैं , एक खत और सही




तू कभी याद  करे , और मेरी याद हों
तेरी खाली आखों मैं, मेरे आसूं और सही




..............Not completed yet







Thursday, May 17, 2012




  थोडा  बहोत  तो सब  जान  लेतें  हैं  
    समझतें सब है , काम कुछ  आतें हैं 
  
     यूँही सबक सीख लिया हमनें ,
     दुश्मन  नहीं ,कुछ  दोस्त  सिखा  जातें हैं




  एक  पल मैं सिमट लेट हैं वो  हमें 
   हम  ज़िन्दगी भर के लिए बिखर जाते है 

   क्या कोई समझे , तू ना लिख  सोनी 
   नासमझ  आपबीती पे  वाहवाही किये जाते है 

Wednesday, April 4, 2012

dontknowtitle



                   
                                       हम  करें मुहब्बत , मुहब्बतें समां कहाँ है
                                        हम करें इबादत और खुँदा कहाँ है


                                       सब कहें सच और हर कोई सच्चाई परस्त है                               
                                        झूठ से भरें लोगो में ज़मीर कहाँ है 




उभर कर आये हम, गमें समंदर से यूँ 
पानी से भरें आखों में आसूं कहाँ है 

यूँ ना मिटें प्यास,सोनी कोई सागर पिजा 
फिर भी गर रहें प्यासी तो माहि कहाँ है